Monday, March 22, 2021

‘’Aum Shivoham’’ - 5 - ‘’ॐ शिवोहम्’’ - मुख्य कविता - ॐ नमः शिवाय् मंत्र को नए आयाम देने की कोशिश...

 


अत्यन्त प्रभावशाली और चमत्कारिक बीज मंत्र हैं ॐ 

तन मन में गुंजित मधुर संगीत है ॐ 
हर मंत्र की शुरुआत है ॐ 
हर ग्रंथ का आगाज़ हैं ॐ 
आध्यात्मिक ध्वनि तरंग हैं ॐ 
एक अनाहत ध्वनि है ॐ 
हर जीवित प्राणी की प्रेरणा हैं ॐ 
निःशब्द का अनुभव है ॐ 
तेजोमय और उज्जवल मनोमस्तिष्क का आधार हैं ॐ 
वातावरण में स्वयमेव फैलती स्वर लहरी है ॐ 
ईश्वरीय प्रेम में प्यासे हृदय का अमृत है ॐ 
उद्वीप्तमान स्वयंभू है ॐ 
आत्म का परम परमात्मा से मिलन का आह्वान है ॐ 
स्वयं में सम्पूर्ण ध्वनि है ॐ 
इस विराट संसार में सर्वत्र विद्यमान है ॐ 
प्रेममय जगत की सृष्टि है ॐ 
विचित्र संसार का पालनकर्ता है ॐ 
बंधनकारी सृष्टि का संहार है ॐ 
सम्पूर्ण जगत की साक्षात् अभिव्यक्ति है ॐ 
ब्रहमा, विष्णु और महेश का आनंदमय स्वरुप है ॐ 
शिव और शक्ति का संगम है ॐ 
विराट आध्यात्मिक मौन का प्रवेश द्वार है ॐ 
सत, रज और तम का सम्मिश्रण है ॐ 
सम्पूर्ण ऐश्वर्य से सराबोर है ॐ 
निश्चलता, पवित्रता और सहृदयता का पर्याय है ॐ 
हर हृदय में प्रेम की असंख्य किरणें बिखेरता है ॐ 
समस्त हृदयों में प्रकाशवान है ॐ 
ज्ञान, प्रेम,बल,एकता और त्याग की पराशक्ति है ॐ 
सूर्य, चन्द्रमा,तारे और सारा ब्रम्हांड जिससे प्रकाशित है,वो है ॐ 
जिसका न आदि हैं,न ही मध्य और ना ही अन्त, वो हैं ॐ 



समस्त दिव्य सदग़ुणों का महासागर हैं ॐ 
साक्षात् वाणिमय अमृत हैं ॐ 
पवित्र प्रार्थनामय जीवन हैं ॐ 
अविनाशी, अजन्मा और सनातन है ॐ 
साक्षात् परात्पर ब्रह्मा हैं ॐ 
समस्त ग्रन्थ, शास्त्रों और वेदों का सर्वप्रथम शब्द हैं ॐ 
स्वयं भगवत स्वरुप है ॐ 
आत्मा, अंतरात्मा और परमात्मा का संगम हैं ॐ 
अदभुत ईश्वरीय प्रेम की अभिव्यक्ति है ॐ 
सम्पूर्ण जगत का प्राकट्य है ॐ 
हर कार्य का मानसिक संकल्प है ॐ 
हर प्राणी के लिए कल्याणकारी और सर्वमंगलकारी है ॐ 
दुष्कर से दुष्कर तपस्या का तपोफल है ॐ 
हर निस्वार्थ कार्य की परम सिद्धि है ॐ 
समस्त संसार का मायावी स्वरुप है ॐ 
साक्षात् मोक्षदायक है ॐ 
सम्पूर्ण जगत की आधार शक्ति है ॐ 
समस्त रूपों में उत्कृष्ट स्वरुप है ॐ 
आराध्य शिव का प्राकट्य है ॐ 
सर्वांग सुन्दर मनोहारी रूप हैं ॐ 
पवित्र प्रेम का विराट सागर है ॐ 
ईश्वरीय कलाओं का सम्पूर्ण सार हैं ॐ 
अद्वितीय,सुन्दर अलंकारों से श्रृंगारित है ॐ 
अर्थमय परम उत्तम अमृत है ॐ 
प्रिय वचनों की बौछार है ॐ 
स्थूल, सूक्ष्म और परा की शब्दमयी विभूति है ॐ 
परमात्मा का चिन्तनमय स्वरुप है ॐ 
सम्पूर्ण शक्तियों का समष्टि रूप है ॐ 
कुण्डलिनी शक्ति का प्राकट्य रूप है ॐ 
परम व्योम का साक्षात् रूप है ॐ 



ईश्वरीय निराकार स्वरुप है ॐ 
संगीत और नृत्य का आदि संगम है ॐ 
क्रिया, तप, जप, ध्यान और ज्ञान का पर्याय है ॐ 
संसार बंधन से मुक्ति का उपाय है ॐ 
शिव का औंकारमय स्वरुप है ॐ 
सम्पूर्ण विद्या की परम चेतना है ॐ 
सम्पूर्ण रोगों की संजीवनी औषधि है ॐ 
समस्त दुखों और सुखों से परे हैं ॐ 
दिव्य प्रकाशस्वरूप है ॐ 
दिव्य परम पुरुष का साक्षात्कार है ॐ 
प्रणववाच्य शम्भू का चिन्तन और जप है ॐ 
महादेव का प्रणव रूप है ॐ 
श्रृंगारित मन की विराट अभिव्यक्ति है ॐ 
दृढ़ संकल्पित मन का साकार रूप है ॐ 
परमेश्वर की स्वरुपभूत अचिंत्य शक्ति है ॐ
शिवभक्तों के सम्पूर्ण जीवन के अर्थ का साधक है ॐ 
वेदों का सार तत्त्व है ॐ 
शिवाज्ञा से सिद्ध शिवस्वरूप वाक्य है ॐ 
सम्पूर्ण  सिद्धियों से परिपूर्ण है ॐ 
सम्पूर्ण मनोरथों की सिद्धि है ॐ 
मन को प्रसन्न,निर्मल और पवित्रमय करता है ॐ 
दिव्य अनुभवों का साक्षात् दर्शन है ॐ 
परब्रह्मा शिव का गंभीर वचन है ॐ 
सर्वज्ञ,सर्वगुण,सर्वव्यापी शिव है ॐ 
निर्गुण सम्प्रभु शिव का वाचक मंत्र है ॐ 
स्वयं चेतन रूप है ॐ 
स्वयं प्रमाणभूत है ॐ 
श्रद्धा और ईश्वरीय प्रेम से परिपूर्ण है ॐ 
संसारी पाप और पुण्य से परे है ॐ
समस्त शुभ कृत्यों का अनुष्ठान है ॐ 



शिवधाम और बारह ज्योतिर्लिंग की प्राप्ति है ॐ 
समस्त श्रुतियों का सिरमौर है ॐ 
समस्त शब्द समुदाय की सनातन बीज रूपिणी है ॐ 
स्वर्णिम आभायुक्त लालिमा धारण किये हुए है ॐ 
शिव का विशाल हृदय है ॐ 
भक्त का निश्छल भाव है ॐ 
सम्पूर्ण शिव संस्कार है ॐ 
शिव के परम पद को जानने वाला है ॐ 
अतिशय उत्कृष्ट ऐश्वर्य से सुशोभित है ॐ 
अत्यन्त करुणा का सागर है ॐ 
अद्भुत, महान, निर्विकार और अविनाशी है ॐ 
शिव पंचाक्षर का अंतिम बीजस्वरूप है ॐ 
परब्रह्मा शिव की पूजा अर्चना है ॐ 
नित्य शिवार्चना में मगन भक्त का वचन है ॐ 
सर्वलोक वन्दित है ॐ 
शिव पार्वती का सत्कार है ॐ 
अत्यन्त पूजनीय और सर्वपीड़ाहारी है ॐ 
स्वयं में अद्वितीय और परम शांतिदायक है ॐ 
लौकिक, पारलौकिक और ऐहलौकिक का सारतत्व है ॐ 
आयु,आरोग्य, ऐश्वर्य और मनोवांछित वस्तु प्रदाता है ॐ 
स्वयं में भक्ति दर्शन है ॐ 
पवित्र मन से वचनामृत है ॐ 
अमृत रस का पान है ॐ 
स्वयं में नित्य सिद्ध है ॐ 
परम परमात्मा शिव का सकल रूप है ॐ 
शिव स्वरुप का बोध है ॐ 
शिव वाच्य है और वाचक है ॐ 
दिव्य नूतन ज्ञान प्रदाता है ॐ 
स्थूल प्रणव है 'नमः शिवाय' , सूक्ष्म प्रणव है ॐ 
आत्मा में रमण और आनन्द का अनुभव है ॐ 



जीवन सर्वस्व है ॐ 
वास्तविक आनंदमय और असीम फलदायी है ॐ 
सूर्यमण्डल के समान तेजोमय अकार 'अ' है ॐ 
अग्नि के समान दीप्तिशाली उकार 'उ' है ॐ 
चन्द्रमण्डल के समान उज्जवल कान्ति मकार 'म' है ॐ 
आनंद के आदिकारण है ॐ 
सम्पूर्ण जगत के परम आश्रय है ॐ 
'अ', 'उ', 'म',त्रिविध रूपों में भगवान महेश्वर ही है ॐ 
प्रेमपूर्वक उच्चारण मात्र से भक्तिवर्धक है ॐ 
आत्म ज्ञानानन्दस्वरुप है ॐ 
लीलाधारी कष्टहारी और कृपा का सागर है ॐ 
शिव की सर्वव्यापी शक्ति है ॐ 
भूत, वर्तमान और भविष्य है ॐ 
सृष्टि की प्रथम ध्वनि है ॐ 
विराट संसार की दृष्टि है ॐ 
शिव का शुभ निवास स्थान है ॐ 
शिव का परमानन्दरूप है ॐ 
पापों को नष्ट करने वाला है ॐ 
जीवन की शक्ति है ॐ 
सुमधुर जीवन योग है ॐ 
हर प्राणी में अनवरत बहती ऊर्जा है ॐ 
हर आत्मा में बहता संगीत है ॐ 
साक्षात् परब्रह्म शक्ति का आह्वान है ॐ 
समस्त तीर्थो का संगम है ॐ 
प्रणव का साकार रूप है ॐ 
'नव' से नूतन ज्ञान देने वाला है ॐ 
समस्त संसार को स्वयं में समेटे रहता है ॐ 
त्रितत्वरूप है ॐ 
स्वयं में सच्चिदानंद स्वरुप है ॐ 
सर्वज्ञ,परिपूर्ण और निस्पृह है ॐ 



सभी वेदों का मूल आधार है ॐ 
निर्गुण,निर्विकार और निर्विकल्प है ॐ 
तद्सद् ब्रह्मा हैं ॐ 
शब्द रूप नाद है ॐ 
परमज्योति स्वरुप है ॐ 
परमानन्दमय है ॐ 
अमृत स्वरुप परब्रम्ह का साक्षात्कार है ॐ 
नित्यानंदमय है ॐ 
समस्त कर्मो का फल देने वाला है ॐ 
पंचाक्षर मंत्र है ॐ 
शिव की आज्ञा से सिद्ध है ॐ 
परम दिव्य है ॐ 
मन को प्रसन्न और निर्मल करने वाला है ॐ 
महा मृत्युंजय है ॐ 
परमेश्वर का गंभीर वचन है ॐ 
सभी विद्याओं का मूल बीज है ॐ 
जीवन का अमिट ज्ञान है ॐ 
शिव का विधि वाक्य है ॐ 
हर 'मैं','तुम' और 'हम' में है ॐ
गहरी आत्मिक शांति का स्रोत हैं ॐ
ईश्वरीय वार्तालाप का माध्यम है ॐ
ईश्वर की स्वर ध्वनि है ॐ
ब्रम्हांड की समस्त ध्वनियों का आधार है ॐ
सम्पूर्ण ब्रम्हांड का 'एक होना' ही है ॐ
सम्पूर्णता का पर्याय है ॐ
सच्ची आद्यात्मिकता का स्पर्श है ॐ
स्वतंत्र मन का पर्याय है ॐ
निरंतर ध्यानावस्था है ॐ
निरंतर स्वाभाविक परिवर्तन है ॐ
ध्यान की पराकाष्ठा है ॐ
मनुष्य की सम्पूर्ण चेतनता अचेतनता का पर्याय है ॐ

ॐ नमः शिवाय !   
- अर्चना ( Archana )






  

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