“मेरी चाहत”
मैं चाहती हूँ,
ज़िन्दगी के हर कदम पर,
मैं स्वयं को शिवमय महसूस करुँ,
ज़िन्दगी में कितने भी उतार चढ़ाव आए,
मैं हमेशा स्वयं को शिव हृदय में पाऊ,
ज़िन्दगी लाखों सवालों की बौछार करे,
मैं हमेशा शिव गुणगान करुँ,
ज़िन्दगी की भीड़ में हजारों गोते लगाऊ,
पर मैं हमेशा शिवजी के दर्शन करुँ,
ज़िन्दगी में चाहे जो हो,
मैं हमेशा शिव के प्रेम का प्याला पियूँ,
ज़िन्दगी में मुझे मोक्ष प्राप्ति हो या ना हो,
पर मैं हमेशा हर जन्म में शिव के अनन्य प्रेम की माला जपूँ।
“शिव प्रेम की माला”
बचपन से लेकर आज तक उन्होंने मुझ पर अपने प्रेम की अनंत बौछार की हैं जिससे मेरा हृदय शिवमय होकर सिर्फ शिव प्रेम की माला जपता हैं इसलिए
मैं उन्हें अपनी साँसों में महसूस करती हूँ,
मैं उन्हें अपनी धड़कनों में महसूस करती हूँ,
उनके अहसास से ही दिल प्रसन्न हो जाता हैं,
उनके भजन सुनने से मन पवित्र हो जाता हैं,
उनके 'शिव कृपा' के दर्शन करवाने से उनके होने का अहसास हो जाता है।
“ईश्वरीय प्रेम”
मेरे हृदय में ईश्वरीय प्रेम की अनवरत बहती रसधार यही कहती मुझसे,
तुम ईश्वरीय समुंद्री जल का वो हिस्सा हों, जो परिस्थितिवश दूर हो गया हैं और जिसका प्रथम व अंतिम लक्ष्य है उस विराट शिवमय समुंद्री जल में आ मिलना। यही तुम्हारे अस्तित्व के विराट स्वरुप को साकार करना हैं।
“ज़िन्दगी के सफर में”
जब मैं सांस लेती हूँ,
आपका नाम मेरी आँखों के सामने आ जाता हैं,
जब मैं चलती हूँ,
आपके कदमों की थाप मैं अपने साथ महसूस करती हूँ,
जब मैं सोती हूँ,
तो निंद्रावस्था में भी आपको महसूस करती हूँ,
जब मैं बंद आँखों से आपको देखती हूँ,
तो दिल में ॐ की आकृति उबर आती हैं,
जब मैं सम्पूर्ण हृदय से प्रार्थना करती हूँ,
तो वो मनोकामना अवश्य पूरी होती हैं,
जब मेरी आँखों से आंसू बहते हैं,
तो आप आकर मुझे थाम लेते हो,
जब मैं आपसे कुछ पूछती हूँ,
तो उसका जवाब मेरे सम्मुख प्रकट कर देते हो,
और मेरी ज़िन्दगी के सफर में कुछ इस तरह जुड़े हो
जैसे दिल से धड़कन।
“शिवमय जीवन”
मेरे दिल में शिव प्रेम की जलती प्रचंड लौ ने मुझे नृत्य और संगीत के समां में कुछ इस तरह बाँधा हैं कि संगीत की धुन जब मेरे कानों को स्पर्श करती हैं तो मेरा रोम रोम नृत्य करने लगता हैं,
ऐसा लगता हैं मानो मेरे मन मस्तिष्क ने मदिरा का सेवन कर लिया हो और उसी सेवन में मेरी आत्मा संगीत की उन स्वर लहरियों के सम्मोहन में आकर नृत्य करने लगती हैं जिससे मुझे कुछ होश नहीं रहता और सारा संसार ही मुझे शिवमय लगने लगता है।
“शिव ही है साकार जीवन”
शिव ही मेरे परम पूज्य आराध्य,
शिव ही मेरी जीवन ऊर्जा,
शिव ही मेरी आध्यात्मिक जीवनी,
शिव ही मेरे परम पिता परमात्मा,
शिव ही मेरे मातृ स्वरुप,
शिव ही मेरे परम प्रिय सखा,
शिव ही मेरे मनमीत,
शिव ही मेरे आदिगुरु,
शिव ही मेरी जीवन तरंग,
शिव ही मेरी आत्मिक ऊर्जा,
शिव ही मेरी प्यास,
शिव ही मेरी आस,
शिव ही मेरी सांस,
शिव ही मेरी शक्ति,
शिव ही मेरी भक्ति,
शिव ही मेरी धड़कन,
शिव ही मेरे नृत्य गुरु,
शिव ही मेरे संगीतज्ञ,
शिव ही मेरी प्राण ऊर्जा,
शिव ही मेरे जीवन की उत्कर्ष इच्छा,
शिव ही मेरा साकार जीवन।
- अर्चना ( Archana )






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