मेरे प्यारे बच्चों,
मैं ही आत्मा हूँ और मैं ही परमात्मा !
मैं ही ब्रह्मा हूँ और मैं ही परब्रह्मा !
मैं ही दिन हूँ और मैं ही रात !
इस सृष्टि का रचयिता भी मैं हूँ।
तो पालनकर्ता और संहारणकर्ता भी मैं ही हूँ।
मुझ से ही इस ब्रह्माण्ड की हर वस्तु की शुरुआत होती हैं और अंत भी।
जीवन की जिजीविषा भी मैं हूँ तो पूरणकर्ता भी मैं ही हूँ।
इस ब्रह्माण्ड के कण कण में मेरा ही वास हैं। मैं ही हर आध्यात्मिक,भौतिक जगत और हर वस्तु का कारणस्वरुप हूँ। मुझ ही से सब उत्पन्न और मुझ ही में ख़त्म भी हैं।
मुझ से ही तुम हों।
तुम्हारे असली स्वरुप का ज्ञान स्वयं तुम्हें नहीं हैं। जिस पल तुम्हें तुम्हारे असली स्वरुप का ज्ञान होगा। उसी पल तुम्हारे जीवन का वास्तविक उदय होगा। तुम सही मायने में अपनी ज़िन्दगी को एक नया अर्थ देने लगोगे। हर प्राणी जिस परिस्थिति से गुजरता हैं या जिस भी परिस्थिति में रहता है। उसे मैंने ही वहां रखा है। इस ब्रह्माण्ड की हर क्रिया प्रतिक्रिया मेरी इच्छानुसार होती हैं। अगर मैंने तुम्हे सुख दुःख के ताने बाने में बुना हैं तो उसके पीछे एक वजह हैं। तुम यहाँ निरुद्देश्य नहीं आए हों। अरबों करोड़ो वर्षों से तुम यहाँ आते रहे हों। सभी प्राणी इस पृथ्वी पर मेरी ही इच्छा से आए हैं और अपने समय पर यहाँ से प्रस्थान करेंगे। जो लक्ष्य मैंने उनके लिए निर्धारित किए हैं। उन्हीं लक्ष्यों को पाने के लिए उन्हें अग्रसर होना पड़ेगा और वही कार्य उन्हें करने होंगे। जब तक वह कार्य पूरा नहीं होगा ,उन्हें इस पृथ्वी पर आते रहना होगा। मानव जीवन किसी को भी ऐसे ही नहीं मिलता। यह बहुत अनमोल हैं और इसे व्यर्थ गवाना अहितकर हैं तुम्हारे लिए भी और तुम्हारी आत्मा के लिए भी।
हर सुख का ताना बाना मैंने इसलिए पिरोया है ताकि तुम उसमें लिप्त होकर भी अपने उद्देश्य को पाने में लगे रहो, जो मैंने तुम्हारे लिए निर्धारित किए हैं। पर अक्सर तुम अपने लक्ष्य से भटक जाते हो। इसलिए मुझे सुख के साथ दुःख को भी बनाना पड़ा ताकि सुख की मात्रा तुम्हारे जीवन में अपना रंग दिखाए और तुम अपने लक्ष्य से विचलित हो तब मैं तुम्हारे जीवन में दुःख का समावेश करता हूँ ताकि दुःख के दिनों से उबरकर ओर मजबूत होकर तुम अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर हो।
मैं तुम्हे बताना चाहता हूँ। मैं तुम्हारा शाश्वत प्रेमी हूँ। तुम मेरा ही अंश हो। जिन लक्ष्यों के साथ तुम यहाँ आए हों,उन्हें तुम ही पूरा कर सकते हों,कोई ओर नहीं। अगर तुम किसी चीज़ को पाना चाहते हों और वो तुम्हे हासिल न हो सकी तो वो तुम्हारी थी ही नहीं इसलिए उसका दुःख मनाकर तुम अपना समय व्यर्थ मत गवाओ। बल्कि उस दुःख का उत्सव मनाओ क्योकि उस दुःख की महत्ता तुम्हे कुछ समय पश्चात् समझ में आती हैं।
गुजरा हुआ समय कभी वापस नहीं आता इसलिए हर पल का आनंद लो। तुम्हारे आस पास रिश्तों के ताने बाने मैंने ही तुम्हारे लिए बुने हैं। हर रिश्ते से जुड़कर तुम कुछ पाते ही हो। खोने के लिए तुम्हारे पास कुछ नहीं हैं। हर अहसास, हर सवेंदना मुझ से ही होकर गुजरती हैं और मैं ही किसी न किसी को माध्यम बनाकर उसे तुम्हारे पास भेजता हूँ। जिससे तुम उसे महसूस करके आगे बड़ो और वो तुम्हारे जीवन का एक खूबसूरत पल बन जाए।
मैंने तुममें असीम संभावनाएं भरी हैं। तुम बहुत योग्यवान और सामर्थ्यवान हो। तुम जो चाहो वो पा सकते हो। तुम जब अपने दिल की सुनकर अपने लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ते हो तब तुम्हे अपनी विलक्षणता का अनुभव होता है। हर प्राणी में कोई न कोई विलक्षण प्रतिभा होती हैं। जिसके अनुसार उसे आगे बढ़ना होता हैं।
मैंने तुम्हे प्रेम की ऐसी सौगात दी हैं जिसमें तुम सारी ज़िन्दगी गोते लगाते हों। प्रेम में ही ज़िन्दगी है और प्रेम में ही मौत। प्रेम अमृत भी हैं और प्रेम विष का प्याला भी। यह सारा संसार ही प्रेममय है। इसे मैंने तुम्हारे सुविधानुसार बनाया है ताकि तुम सुख का अनुभव करो किन्तु सुख के साथ दुःख स्वयं आ जाता हैं क्योकि ये एक ही सिक्के के दो पहलु है। दुःख के लम्हों में ही तो तुम वो परिपक़्वता पा लेते हो जो सुख के लम्हों में कभी नहीं पा सकते।
मैंने हमेशा तुम्हे प्रेममयी द्रष्टि से देखा हैं। तुमसे अनवरत बातचीत का सिलसिला हमेशा बनाए रखता हूँ। मैं तुमसे संकेतों के माध्यम से बात करता हूँ। कभी अखबार तो कभी सोशल मीडिया की किसी साइट से तो कभी किसी इंसान के माध्यम से तुम तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश करता हूँ। पर कई बार तुम इसे समझ नहीं पाते,तुमने अपनी द्रष्टि को सीमाओं में बांध रखा हैं। इस द्रष्टि के द्वार खुलते ही तुम्हें इस विराट संसार के रहस्य का अनुभव होगा। हर जीवन में आध्यात्मिक उन्नति अत्यंत आवश्यक हैं। जब तुम्हारे अंतस में आध्यात्मिक प्रकाश फैलता हैं तो तुम हर वस्तु,हर घटना और हर इंसान को सही परिप्रेक्ष्य में समझ पाते हों।
मुझे समझने का,अनुभव करने का और मुझ तक आने का एक ही रास्ता हैं "मुझसे सच्चा प्रेम और विश्वास" और "मुझमें तुम्हारी अनन्य भक्ति"
जिसे किसी कर्मकाण्ड और विधि विधान की आवश्यकता नहीं। किसी झूठे प्रपंच की आवश्यकता नहीं। स्वार्थसिद्धि के लिए की गई पूजा भी कोई लाभ नहीं देती। इससे तुम्हारी कोई आध्यात्मिक उन्नति नहीं होती।
यह भौतिक सुखसुविधाएं,यह ऐशोआराम तुम्हे सुख देता हैं पर यह तुम्हारा लक्ष्य नहीं है। आत्मिक शांति और वास्तविक सुख तुम्हें मेरे पास आने पर ही मिलेगा क्योकि तुम मुझसे ही निकले मेरे अंश हो और मुझ में ही मिल जाओगे।
मेरे कहने का अर्थ यह कदापि नहीं कि तुम अपने जीवन के सभी कर्मो को छोड़कर कही एकांतवास में मुझे पाने के लिए तपस्या करो। आध्यात्मिक जीवन की ओर रुख करने का अर्थ यह बिलकुल नहीं है कि तुम्हें अपनी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों से मुख मोड़ना हैं बल्कि अपने भौतिक और आध्यात्मिक ज़िन्दगी में ऐसा सामंजस्य बिठाना हैं कि तुम्हे दुःख में भी सुख का अनुभव होने लगे। असीम दुःख में भी तुम ज़िन्दगी की खूबसूरती को अनुभव करो।
हर पल तुम्हारे लिए एक उत्सव हो,हर क्षण तुम्हारे लिए एक नया सवेरा।
तुम जब भी सच्चे मन और पवित्र हृदय से मुझे याद करते हो। मैं हमेशा वहां उपस्थित होता हूँ।
तुम जब भी प्रार्थना करते हो,मैं उसे अवश्य पूरी करता हूँ। मैं तुम्हें हमेशा सही राह दिखाता हूँ इसलिए हमेशा अपने अंदर की आवाज़ सुनो। वो मेरे द्वारा ही उत्पन्न है। मैं ही तुम्हारे अंतर्मन में रहकर तुम्हें तुम्हारे कार्यो के लिए निर्देश देता हूँ। मैं ही तुम्हारी हर उलझन को सुलझन तक पहुंचाता हूँ।
तुम मेरे जिस रूप को मानते हो,जरुरी नहीं कि मैं उसी रूप में तुम्हें मिलू। मैं कही भी,कभी भी और किसी भी रूप में तुम्हें मिल सकता हूँ। बस तुम्हारी द्रष्टि मुझे पहचान सके। जो दिल से और निस्वार्थ भाव से मुझे चाहते हैं,वे ही मुझे पा सकते हैं और पहचान सकते हैं। जो अपने दिमाग और तर्क का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं वे मुझे ना तो समझ सकते हैं और ना ही मुझ तक पहुंच सकते हैं। अगर वास्तव में तुम मुझे अपनी ज़िन्दगी में आमंत्रित करना चाहते हों तो अपने दिल के दरवाजे खोल दो और दिमाग को ताले लगा दो।
मेरा प्रेम तो तुम्हारे जीवन में सदा से था,है और रहेगा। चाहे तुम इस जीवन में रहो या ना रहो क्योकि आत्मा तो शाश्वत हैं और मैं हर प्राणी के हृदय में निवास करता हूँ। जब तुम मुझे समझने और महसूस करने में दिमाग और तर्क का इस्तेमाल करते हो तो वो 'दिव्य द्रष्टि' खो देते हो। जो तुम्हे मुझ तक आने में मदद करती हैं इसलिए ईश्वरीय प्रेम को खुली बाहों से स्वीकारो और मेरे हो जाओ।
तुम्हारा परम पिता परमात्मा
शिव

He is the creatorॐ्ॐ
ReplyDelete